चुनाव आयोग पर भड़के वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी, बोले – लोकतंत्र खत्म करने की साजिश, लगाए इमरजेंसी की मांग

VIP chief Mukesh Sahni got angry at Election Commission, said - Conspiracy to end democracy, demand to impose emergency

पटना: विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने आज महागठबंधन की संयुक्त प्रेस वार्ता में मतदाता सूची की समीक्षा प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने इसे लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश में आपातकाल (इमरजेंसी) लगाने की मांग तक कर डाली।

“चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा”
मुकेश सहनी ने कहा कि अभी मतदाता सूची के परीक्षण कार्य को पूरा होने में एक सप्ताह का समय शेष है, लेकिन चुनाव आयोग ने पहले ही सूची जारी कर दी है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग को निष्पक्ष रहना चाहिए, लेकिन वह भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है, जिससे वोटरों को मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।

“देश में इमरजेंसी लगाने की जरूरत”
सहनी ने कहा,

“भाजपा और प्रधानमंत्री को चाहिए कि देश में इमरजेंसी लागू कर दें। अगर मतदाता ही वोट नहीं दे पाएंगे तो चुनाव की जरूरत ही क्या है?”

उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनाव में करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, तो फिर सही मतदाता सूची जारी करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी क्यों नहीं निभाई जा रही?

“नाम और टाइटल देखकर काटे जा रहे वोट”
मुकेश सहनी ने आशंका जताई कि विधानसभा चुनाव के बाद पंचायत चुनाव भी होने हैं और अगर अब नाम और टाइटल देखकर मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं, तो आगे की राह और भी कठिन होगी। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों को सतर्क रहने की अपील की।

बीएलओ और जनप्रतिनिधियों से की अपील
सहनी ने बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) से अपील करते हुए कहा कि वे ईमानदारी से काम करें और सही मतदाताओं के नाम सूची में दर्ज करें। साथ ही उन्होंने मुखिया, सरपंच और वार्ड सदस्यों से भी एक-एक मतदाता का नाम जोड़वाने का आग्रह किया।

“नाम काटे जाने की देनी चाहिए जानकारी”
अंत में उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, उन्हें इसका कारण स्पष्ट रूप से बताया जाए ताकि वे अपनी बात रख सकें और वोट देने के अधिकार से वंचित न हों।

मुकेश सहनी का यह बयान आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर सकता है।

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